Diwali-2018 - Diwali kyu manaya jata hai | दीवाली क्यों मनाया जाता है

Diwali-2018- Diwali kaise manayi jaati hai(दीवाली कैसे मनाई जाती है)

                                                  7 November 2018 - Happy Diwali
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Diwali-2018 -Diwali kaise manaya jata hai:-  जैसा कि दोस्तों आप सबको पता है कि दिवाली आ चुकी है और दिवाली के आते ही सभी के घरों में साफ-सफाई शुरू हो जाती है और दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसे सब लोग बहुत ही निष्ठा से मनाते हैं और इस त्यौहार में सभी लोग खुशी में मिठाइयां बांटते हैं अपने रिश्तेदारों को अपने पड़ोसियों को सबको मिठाइयां खिलाते हैं। लोग आपस की दुश्मनी को भुलाकर एक साथ मिलकर दिवाली मनाते हैं तो कुछ ऐसा ही हमारा दिवाली का त्योहार जिस में हर कोई बहुत ही खुश मन से दिवाली को मनाता है श्री लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा की जाती है।


दीवाली कैसे मनाई जाती हैं!!==>>  तो आइए जान लेते हैं कि किस तरीके से हमारे भारत में दिवाली को मनाया जाता है। ऐसा बताया जाता है कि दिवाली 5 दिन की होती है जिसमेंं धनतेरस छोटी दिवाली बड़ी दिवाली मुख्य है। दीवाली के कुछ दिनों पहले  ही सभी के घरों में साफ सफाई शुरू हो जाती है और इस दिन लोगों के घरों के सभी कोने की सफाई होती है  और दिवाली के पहले दिन अर्थात धनतेरस को लोग लोहे की स्टील की कुछ ना कुछ सामान जरूर खरीदते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि हमारेेेे पूर्वजों का मानना है की धनतेरस के दिन कुछ खरीदारी बहुत ही शुभ माना जाता है। दिवाली वाले दिन घरों की इतनी अच्छी सफाई होती है और रात को यानी की दीवाली की रात को लोगोंं के घर दीयों से जगमगा उठते हैं और फिर दिवाली की रात को श्री लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती वंदना करने के बाद लोग सबको मिठाइयां खिलातेे हैं और फिर पटाखे फोड़ते हैं तो कुछ इस तरीके से हमारे भारत में दीवाली मनाई जाती है।

दीवाली क्यों मनाई जाती है!!==> अब आप में से बहुत लोग सोच रहे होंगे कि आखिर दिवाली की शुरुआत कब हुई आखिर क्योंं दीवाली मनाई जाने लगी। तो मैं आप सबको बता दूं कि दीवाली मनाने के अनेकों कारण है लेकिन आज हम सिर्फ एक कारण के बारे में बात करेंगे जोकि रावण और सभी असुरों के अंत पर मनाया जाता है। जब भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास के लिए भेजा गया तो वहांं उनको बहुत सारेे असुरों का सामना करना पड़ा जिनमें से एक  रावण भी था। जिसने भगवान श्री राम की पत्नी माता सीता का अपहरण कर लिया तो भगवान श्रीराम ने रावण का अंत कर माता सीता को रावण की गिरफ्त से मुक्त किया और फिर 14 वर्ष का वनवास बीतने के बाद जब श्रीरामचंद्र जी अयोध्या वापस आए तो उनकेेे स्वागत में सभी अयोध्यावासियों ने पुष्प और दीयों से इनका स्वागत किया तब से ही दिवाली मनाई जाने लगी।

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